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नवद्वारम पुरम गत्वा सततं नियतो वशी
ईश्वरः सर्वलोकेषु स्थावरस्य चरस्य च
तमेवाहुरणुभ्योंअणुम तं महाद्भूयो महत्तरम
बहुधा सर्वभूतानि व्याज्य तिष्ठति शाश्वतं
क्षेत्रज्ञमेकत: कृत्वा सर्वे क्षेत्रमथैकत:
एवं संविमृशोज्ञIनि संयत: सततं हृदि
******************************************** ” नौ द्वार वाले नगर (शरीर) में जाकर वह सदा नियम पूर्वक निवास करता हैं….!. सब को वश में रखता हैं….!. सम्पूर्ण कोकों में चराचर प्राणियों का शासन करनेवाला ईश्वर भी वाही हैं ….!. उसे अणु से भी अणु और महान से भी महान कहते हैं…..!. वह नाना प्रकार के सभी प्राणियों को व्याप्त करके सदा स्थित रहता हैं….!. क्षेत्रज्ञ को एक ऑर करके दूसरी ऑर सम्पूर्ण क्षेत्र को पृथक करके रखे हैं….!. संयमपूर्वक रहनेवाला ज्ञiनि पुरुष सदा इस प्रकार अपने ह्रदय में विचार करता रहे - जड़ ऑर चेतन की पृथकता का विवेचन किया करे…..!
– श्रीमहाभारत अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय: (via discoveryofhindustan)

(Source: krishna.com, via discoveryofhindustan)

सा हि सर्वेषु भूतेशु स्थावारेषु चरेषु च I
वासत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित: II
नैव चोहर्वे न तिर्यक च नाधस्तान्न कदाचन I
इन्द्रियेरिः बुध्या व न दृश्येत कदाचन II
******************************************
नाना भावों से युक्त वह महापराक्रमी परमात्मा अकेला हि सम्पूर्ण चराचर भूतों में निवास करता हैं ….!. वह न ऊपर , न अगल- बगल में और न नीचे हि कभी दीखायी देता हैं….!. वह यहाँ इन्द्रियों अधवा बूढी के द्वारा कदापि दीखायी नहीं देता ……!.
– “श्रीमहाभारत -अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय: “ (via discoveryofhindustan)

(Source: bharatadesam.com, via discoveryofhindustan)

सा हि सर्वेषु भूतेशु स्थावारेषु चरेषु च
वासत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित:
नैव चोहर्वे न तिर्यक च नाधस्तान्न कदाचन
इन्द्रियेरिः बुध्या व न दृश्येत कदाचन
************************************************* ” नाना भावों से युक्त वह महापराक्रमी परमात्मा अकेला हि सम्पूर्ण चराचर भूतों में निवास करता हैं ….!. वह न ऊपर , न अगल- बगल में और न नीचे हि कभी दीखायी देता हैं….!. वह यहाँ इन्द्रियों अधवा बूढी के द्वारा कदापि दीखायी नहीं देता ……!.
नवद्वारम पुरम गत्वा सततं नियतो वशी
ईश्वरः सर्वलोकेषु स्थावरस्य चरस्य च
तमेवाहुरणुभ्योंअणुम तं महाद्भूयो महत्तरम
बहुधा सर्वभूतानि व्याज्य तिष्ठति शाश्वतं
क्षेत्रज्ञमेकत: कृत्वा सर्वे क्षेत्रमथैकत:
एवं संविमृशोज्ञIनि संयत: सततं हृदि
” नौ द्वार वाले नगर (शरीर) में जाकर वह सदा नियम पूर्वक निवास करता हैं….!. सब को वश में रखता हैं….!. सम्पूर्ण कोकों में चराचर प्राणियों का शासन करनेवाला ईश्वर भी वाही हैं ….!. उसे अणु से भी अणु और महान से भी महान कहते हैं…..!. वह नाना प्रकार के सभी प्राणियों को व्याप्त करके सदा स्थित रहता हैं….!. क्षेत्रज्ञ को एक ऑर करके दूसरी ऑर सम्पूर्ण क्षेत्र को पृथक करके रखे हैं….!. संयमपूर्वक रहनेवाला ज्ञiनि पुरुष सदा इस प्रकार अपने ह्रदय में विचार करता रहे - जड़ ऑर चेतन की पृथकता का विवेचन किया करे…..!
– “श्रीमहाभारत -अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय: “ (via discoveryofhindustan)

(Source: bharatadesam.com, via discoveryofhindustan)

अव्यक्तं सर्वदेहेषु मर्त्येषमरमाश्रितम
यः पश्येत परमात्मानं बंधनैय: सा विमुच्यते
” जो सम्पूर्त्न मर्त्य शरीरों में अव्यक्त भाव से स्थित एवं अमर हैं, उस परमात्मा को जो देखता हैं , वह बंधनों से मुक्त हो जाता हैं…..!.
– ’ श्रीमहाभारत-अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय: “ (via discoveryofhindustan)

(Source: srimadbhagavatam.org, via discoveryofhindustan)

अव्यक्तं सर्वदेहेषु मर्त्येषमरमाश्रितम
यः पश्येत परमात्मानं बंधनैय: सा विमुच्यते
” जो सम्पूर्त्न मर्त्य शरीरों में अव्यक्त भाव से स्थित एवं अमर हैं, उस परमात्मा को जो देखता हैं , वह बंधनों से मुक्त हो जाता हैं…..!.
– ’ श्रीमहाभारत-अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय: “ (via discoveryofhindustan)

(Source: srimadbhagavatam.org, via discoveryofhindustan)

” THE FACE BOOK FACE OFF”

” THE FACE BOOK FACE OFF”

” GIVE ME SOME SUNSHINE, GIVE ME SOME RAIN….!

” IT’S GOING ON SINCE 1947……!”

(Source: articles.timesofindia.indiatimes.com)

" THE POWER OF INDIAN MEDIA.....!"

“मीडिया एक्सचेंज वाले समझौते के बाद दोनों देशों के मीडियाकर्मी एक-दूसरे के यहां आसानी से आ जा सकेंगे। इनका खर्च अखबार प्रबंधन के बजाय खुद सरकारें वहन करेंगी। यह जानकारी मंगोलिया में भारतीय राजदूत सतबीर सिंह और विदेश सचिव (पूर्व) संजय सिंह ने दी।”

(Source: defencenews.in)

” THE FILM SENSOR BOARD CHAIRPERSON IS ALSO……!, BUT AN UNKNOWN……!.

“THIS ARROGANT ATTITUDE OF THE COMMUNITY IS VISIBLE EVERYWHERE IN INDIA NOW, THE CLOSEST NEIGHBOR  FOR DECADES REFUSE TO ACKNOWLEDGE YOU  AND BOUNDARIES  ALSO……..!”

” THE FILM SENSOR BOARD CHAIRPERSON IS ALSO……!, BUT AN UNKNOWN……!.

“THIS ARROGANT ATTITUDE OF THE COMMUNITY IS VISIBLE EVERYWHERE IN INDIA NOW, THE CLOSEST NEIGHBOR FOR DECADES REFUSE TO ACKNOWLEDGE YOU AND BOUNDARIES ALSO……..!”

(Source: jatland.com)

1 ). जिष्णु रथेष्ठा: समयों युवास्य
यजमानस्य वीरो जायतां I
“निकामे निकामे न: पर्जन्यो वर्षतु
फलवत्यो न ओषधय: पच्यान्ताम
योगक्षेमे न: कल्पताम “
************************


” इस यज्ञ के याग्मान के घर पुत्र हो
विजयी , प्रखर वक्ता, युवा, रथचारी , वीर
ब्रह्मन , हमारे राष्ट्र में
होती रहे वर्षा याधावश्यक सदा
ओषधी बनती रहे फलवत अपने समय से
सर्वदा स्थिर हो हमारा योगक्षेम “
***********************************
TO HIM WHO OFFERS THIS SACRIFICE,
MAY A YOUTHFUL HEROIC SON BE BORN , A CHAMPION
A CHARIOT FIGHTER, A PERSUASIVE SPEAKER IN ASSEMBLIES
MAY HEAVEN RAIN IN ACCORDANCE WITH OUR NEEDS,
MAY OUR PLANTS RIPEN AND BEAR FRUITS IN SEASON,
MAY JOY AND PROSPERITY BE TO US….!”
यजुर्वेद :- २२/२२
********************************
२ ). आ ब्रह्मन ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायताम I
आ राष्ट्रे राजन्य: शूर इशाब्योअतिव्याधि महारथो जायताम I
दोग्घ्री धेनुर वोदानंग्वान आशु: प्राप्ति: पुरुन्धिर योषा I
***************************************************
“ब्रह्मन , भगवान् हमारे राष्ट्र में
ज्ञान से भास्वान ब्राह्मण जन्म ले
योधा हमारे शूर, तीरंदाज़ और महारधी
हो , दूधरु गाय , बैल सशक्त , वेगी अश्व हो,
हो स्त्रियाँ गृहिणी कुशल ….!”
**************************************
IN THIS OUR COUNTRY , O BRAHMAN
MAY THE PRIESTS BE BORN BRILLIANT WITH SACRED KNOWLEDGE,
MAY THE WARRIORS BE BORN BRAVE,
SKILLFUL ARCHERS, EXCELLENT MARKSMEN,
INVINCIBLE CHARIOT FIGHTERS
MAY THE COWS YIELD PLENTY OF MILK ,
THE OXEN BE TIRELESS, THE HORSES BE SWIFT,
THE WOMEN BE SKILLFUL HOUSEWIVES….!
यजुर्वेद :- २२/२२

‘RAMDAS” (via discoveryofhindustan)

” THE BLASPHEMOUS WONT BE ABLE TO UNDERSTAND THE TRUE MEANING OF THIS…..!.”

(Source: indiasite.com, via discoveryofhindustan)

STATE GETTING POORER, BADALS RICHER……..!.

“RICH BADALS BRINGS YOU RICH AND HEAVY RAIN,
HEAVY RAINS WILL BRING YOU HEAVY HARVEST
HEAVY HARVEST MAKE YOU RICH…….!”

   “VEDAS”

STATE GETTING POORER, BADALS RICHER……..!.

“RICH BADALS BRINGS YOU RICH AND HEAVY RAIN,
HEAVY RAINS WILL BRING YOU HEAVY HARVEST
HEAVY HARVEST MAKE YOU RICH…….!”

“VEDAS”

WHAT YOU GOING TO DO WITH ME …?. SO FAR YOU DESTROYED ME , AND KILLED ME ETERNALLY, FOR NO REASONS AT ALL , NOW ON , I WILL GIVE YOU A THOUSAND REASONS TO DO SO, BEFORE DYING I MUST KNOW FOR WHAT I’M DYING OR BEING PUNISHED( THAT’S MY FUNDAMENTAL RIGHT), NOW I’LL DIE PEACEFULLY……!. BUT TILL THE END I’LL GIVE YOU INNUMERABLE REASONS………!.I DON’T GIVE A DAMN TO YOUR PARALLEL LEGAL SYSTEM……!.
– “VANAYIDATHU PATTUPURATHU MADAMPI RAMDAS”
discoveryofhindustan:

“JAPJI SAHIB’

discoveryofhindustan:

“JAPJI SAHIB’

(Source: singhsahib.com)

नवद्वारम पुरम गत्वा सततं नियतो वशी
ईश्वरः सर्वलोकेषु स्थावरस्य चरस्य च
तमेवाहुरणुभ्योंअणुम तं महाद्भूयो महत्तरम
बहुधा सर्वभूतानि व्याज्य तिष्ठति शाश्वतं
क्षेत्रज्ञमेकत: कृत्वा सर्वे क्षेत्रमथैकत:
एवं संविमृशोज्ञIनि संयत: सततं हृदि
******************************************** ” नौ द्वार वाले नगर (शरीर) में जाकर वह सदा नियम पूर्वक निवास करता हैं….!. सब को वश में रखता हैं….!. सम्पूर्ण कोकों में चराचर प्राणियों का शासन करनेवाला ईश्वर भी वाही हैं ….!. उसे अणु से भी अणु और महान से भी महान कहते हैं…..!. वह नाना प्रकार के सभी प्राणियों को व्याप्त करके सदा स्थित रहता हैं….!. क्षेत्रज्ञ को एक ऑर करके दूसरी ऑर सम्पूर्ण क्षेत्र को पृथक करके रखे हैं….!. संयमपूर्वक रहनेवाला ज्ञiनि पुरुष सदा इस प्रकार अपने ह्रदय में विचार करता रहे - जड़ ऑर चेतन की पृथकता का विवेचन किया करे…..!
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(Source: krishna.com, via discoveryofhindustan)

सा हि सर्वेषु भूतेशु स्थावारेषु चरेषु च I
वासत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित: II
नैव चोहर्वे न तिर्यक च नाधस्तान्न कदाचन I
इन्द्रियेरिः बुध्या व न दृश्येत कदाचन II
******************************************
नाना भावों से युक्त वह महापराक्रमी परमात्मा अकेला हि सम्पूर्ण चराचर भूतों में निवास करता हैं ….!. वह न ऊपर , न अगल- बगल में और न नीचे हि कभी दीखायी देता हैं….!. वह यहाँ इन्द्रियों अधवा बूढी के द्वारा कदापि दीखायी नहीं देता ……!.
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सा हि सर्वेषु भूतेशु स्थावारेषु चरेषु च
वासत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित:
नैव चोहर्वे न तिर्यक च नाधस्तान्न कदाचन
इन्द्रियेरिः बुध्या व न दृश्येत कदाचन
************************************************* ” नाना भावों से युक्त वह महापराक्रमी परमात्मा अकेला हि सम्पूर्ण चराचर भूतों में निवास करता हैं ….!. वह न ऊपर , न अगल- बगल में और न नीचे हि कभी दीखायी देता हैं….!. वह यहाँ इन्द्रियों अधवा बूढी के द्वारा कदापि दीखायी नहीं देता ……!.
नवद्वारम पुरम गत्वा सततं नियतो वशी
ईश्वरः सर्वलोकेषु स्थावरस्य चरस्य च
तमेवाहुरणुभ्योंअणुम तं महाद्भूयो महत्तरम
बहुधा सर्वभूतानि व्याज्य तिष्ठति शाश्वतं
क्षेत्रज्ञमेकत: कृत्वा सर्वे क्षेत्रमथैकत:
एवं संविमृशोज्ञIनि संयत: सततं हृदि
” नौ द्वार वाले नगर (शरीर) में जाकर वह सदा नियम पूर्वक निवास करता हैं….!. सब को वश में रखता हैं….!. सम्पूर्ण कोकों में चराचर प्राणियों का शासन करनेवाला ईश्वर भी वाही हैं ….!. उसे अणु से भी अणु और महान से भी महान कहते हैं…..!. वह नाना प्रकार के सभी प्राणियों को व्याप्त करके सदा स्थित रहता हैं….!. क्षेत्रज्ञ को एक ऑर करके दूसरी ऑर सम्पूर्ण क्षेत्र को पृथक करके रखे हैं….!. संयमपूर्वक रहनेवाला ज्ञiनि पुरुष सदा इस प्रकार अपने ह्रदय में विचार करता रहे - जड़ ऑर चेतन की पृथकता का विवेचन किया करे…..!
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अव्यक्तं सर्वदेहेषु मर्त्येषमरमाश्रितम
यः पश्येत परमात्मानं बंधनैय: सा विमुच्यते
” जो सम्पूर्त्न मर्त्य शरीरों में अव्यक्त भाव से स्थित एवं अमर हैं, उस परमात्मा को जो देखता हैं , वह बंधनों से मुक्त हो जाता हैं…..!.
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यः पश्येत परमात्मानं बंधनैय: सा विमुच्यते
” जो सम्पूर्त्न मर्त्य शरीरों में अव्यक्त भाव से स्थित एवं अमर हैं, उस परमात्मा को जो देखता हैं , वह बंधनों से मुक्त हो जाता हैं…..!.
– ’ श्रीमहाभारत-अनुशासन पर्वाणि पञ्चशत्वारिशदथिकशततमो अध्याय: “ (via discoveryofhindustan)

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” THE FACE BOOK FACE OFF”

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(Source: articles.timesofindia.indiatimes.com)

" THE POWER OF INDIAN MEDIA.....!"

“मीडिया एक्सचेंज वाले समझौते के बाद दोनों देशों के मीडियाकर्मी एक-दूसरे के यहां आसानी से आ जा सकेंगे। इनका खर्च अखबार प्रबंधन के बजाय खुद सरकारें वहन करेंगी। यह जानकारी मंगोलिया में भारतीय राजदूत सतबीर सिंह और विदेश सचिव (पूर्व) संजय सिंह ने दी।”

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” THE FILM SENSOR BOARD CHAIRPERSON IS ALSO……!, BUT AN UNKNOWN……!.

“THIS ARROGANT ATTITUDE OF THE COMMUNITY IS VISIBLE EVERYWHERE IN INDIA NOW, THE CLOSEST NEIGHBOR  FOR DECADES REFUSE TO ACKNOWLEDGE YOU  AND BOUNDARIES  ALSO……..!”

” THE FILM SENSOR BOARD CHAIRPERSON IS ALSO……!, BUT AN UNKNOWN……!.

“THIS ARROGANT ATTITUDE OF THE COMMUNITY IS VISIBLE EVERYWHERE IN INDIA NOW, THE CLOSEST NEIGHBOR FOR DECADES REFUSE TO ACKNOWLEDGE YOU AND BOUNDARIES ALSO……..!”

(Source: jatland.com)

1 ). जिष्णु रथेष्ठा: समयों युवास्य
यजमानस्य वीरो जायतां I
“निकामे निकामे न: पर्जन्यो वर्षतु
फलवत्यो न ओषधय: पच्यान्ताम
योगक्षेमे न: कल्पताम “
************************


” इस यज्ञ के याग्मान के घर पुत्र हो
विजयी , प्रखर वक्ता, युवा, रथचारी , वीर
ब्रह्मन , हमारे राष्ट्र में
होती रहे वर्षा याधावश्यक सदा
ओषधी बनती रहे फलवत अपने समय से
सर्वदा स्थिर हो हमारा योगक्षेम “
***********************************
TO HIM WHO OFFERS THIS SACRIFICE,
MAY A YOUTHFUL HEROIC SON BE BORN , A CHAMPION
A CHARIOT FIGHTER, A PERSUASIVE SPEAKER IN ASSEMBLIES
MAY HEAVEN RAIN IN ACCORDANCE WITH OUR NEEDS,
MAY OUR PLANTS RIPEN AND BEAR FRUITS IN SEASON,
MAY JOY AND PROSPERITY BE TO US….!”
यजुर्वेद :- २२/२२
********************************
२ ). आ ब्रह्मन ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायताम I
आ राष्ट्रे राजन्य: शूर इशाब्योअतिव्याधि महारथो जायताम I
दोग्घ्री धेनुर वोदानंग्वान आशु: प्राप्ति: पुरुन्धिर योषा I
***************************************************
“ब्रह्मन , भगवान् हमारे राष्ट्र में
ज्ञान से भास्वान ब्राह्मण जन्म ले
योधा हमारे शूर, तीरंदाज़ और महारधी
हो , दूधरु गाय , बैल सशक्त , वेगी अश्व हो,
हो स्त्रियाँ गृहिणी कुशल ….!”
**************************************
IN THIS OUR COUNTRY , O BRAHMAN
MAY THE PRIESTS BE BORN BRILLIANT WITH SACRED KNOWLEDGE,
MAY THE WARRIORS BE BORN BRAVE,
SKILLFUL ARCHERS, EXCELLENT MARKSMEN,
INVINCIBLE CHARIOT FIGHTERS
MAY THE COWS YIELD PLENTY OF MILK ,
THE OXEN BE TIRELESS, THE HORSES BE SWIFT,
THE WOMEN BE SKILLFUL HOUSEWIVES….!
यजुर्वेद :- २२/२२

‘RAMDAS” (via discoveryofhindustan)

” THE BLASPHEMOUS WONT BE ABLE TO UNDERSTAND THE TRUE MEANING OF THIS…..!.”

(Source: indiasite.com, via discoveryofhindustan)

STATE GETTING POORER, BADALS RICHER……..!.

“RICH BADALS BRINGS YOU RICH AND HEAVY RAIN,
HEAVY RAINS WILL BRING YOU HEAVY HARVEST
HEAVY HARVEST MAKE YOU RICH…….!”

   “VEDAS”

STATE GETTING POORER, BADALS RICHER……..!.

“RICH BADALS BRINGS YOU RICH AND HEAVY RAIN,
HEAVY RAINS WILL BRING YOU HEAVY HARVEST
HEAVY HARVEST MAKE YOU RICH…….!”

“VEDAS”

WHAT YOU GOING TO DO WITH ME …?. SO FAR YOU DESTROYED ME , AND KILLED ME ETERNALLY, FOR NO REASONS AT ALL , NOW ON , I WILL GIVE YOU A THOUSAND REASONS TO DO SO, BEFORE DYING I MUST KNOW FOR WHAT I’M DYING OR BEING PUNISHED( THAT’S MY FUNDAMENTAL RIGHT), NOW I’LL DIE PEACEFULLY……!. BUT TILL THE END I’LL GIVE YOU INNUMERABLE REASONS………!.I DON’T GIVE A DAMN TO YOUR PARALLEL LEGAL SYSTEM……!.
– “VANAYIDATHU PATTUPURATHU MADAMPI RAMDAS”
"नवद्वारम पुरम गत्वा सततं नियतो वशी
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एवं संविमृशोज्ञIनि संयत: सततं हृदि
******************************************** ” नौ द्वार वाले नगर (शरीर) में जाकर वह सदा नियम पूर्वक निवास करता हैं….!. सब को वश में रखता हैं….!. सम्पूर्ण कोकों में चराचर प्राणियों का शासन करनेवाला ईश्वर भी वाही हैं ….!. उसे अणु से भी अणु और महान से भी महान कहते हैं…..!. वह नाना प्रकार के सभी प्राणियों को व्याप्त करके सदा स्थित रहता हैं….!. क्षेत्रज्ञ को एक ऑर करके दूसरी ऑर सम्पूर्ण क्षेत्र को पृथक करके रखे हैं….!. संयमपूर्वक रहनेवाला ज्ञiनि पुरुष सदा इस प्रकार अपने ह्रदय में विचार करता रहे - जड़ ऑर चेतन की पृथकता का विवेचन किया करे…..!"
"सा हि सर्वेषु भूतेशु स्थावारेषु चरेषु च I
वासत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित: II
नैव चोहर्वे न तिर्यक च नाधस्तान्न कदाचन I
इन्द्रियेरिः बुध्या व न दृश्येत कदाचन II
******************************************
नाना भावों से युक्त वह महापराक्रमी परमात्मा अकेला हि सम्पूर्ण चराचर भूतों में निवास करता हैं ….!. वह न ऊपर , न अगल- बगल में और न नीचे हि कभी दीखायी देता हैं….!. वह यहाँ इन्द्रियों अधवा बूढी के द्वारा कदापि दीखायी नहीं देता ……!."
"सा हि सर्वेषु भूतेशु स्थावारेषु चरेषु च
वासत्येको महावीर्यो नानाभावसमन्वित:
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इन्द्रियेरिः बुध्या व न दृश्येत कदाचन
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नवद्वारम पुरम गत्वा सततं नियतो वशी
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क्षेत्रज्ञमेकत: कृत्वा सर्वे क्षेत्रमथैकत:
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” नौ द्वार वाले नगर (शरीर) में जाकर वह सदा नियम पूर्वक निवास करता हैं….!. सब को वश में रखता हैं….!. सम्पूर्ण कोकों में चराचर प्राणियों का शासन करनेवाला ईश्वर भी वाही हैं ….!. उसे अणु से भी अणु और महान से भी महान कहते हैं…..!. वह नाना प्रकार के सभी प्राणियों को व्याप्त करके सदा स्थित रहता हैं….!. क्षेत्रज्ञ को एक ऑर करके दूसरी ऑर सम्पूर्ण क्षेत्र को पृथक करके रखे हैं….!. संयमपूर्वक रहनेवाला ज्ञiनि पुरुष सदा इस प्रकार अपने ह्रदय में विचार करता रहे - जड़ ऑर चेतन की पृथकता का विवेचन किया करे…..!"
"अव्यक्तं सर्वदेहेषु मर्त्येषमरमाश्रितम
यः पश्येत परमात्मानं बंधनैय: सा विमुच्यते
” जो सम्पूर्त्न मर्त्य शरीरों में अव्यक्त भाव से स्थित एवं अमर हैं, उस परमात्मा को जो देखता हैं , वह बंधनों से मुक्त हो जाता हैं…..!."
"अव्यक्तं सर्वदेहेषु मर्त्येषमरमाश्रितम
यः पश्येत परमात्मानं बंधनैय: सा विमुच्यते
” जो सम्पूर्त्न मर्त्य शरीरों में अव्यक्त भाव से स्थित एवं अमर हैं, उस परमात्मा को जो देखता हैं , वह बंधनों से मुक्त हो जाता हैं…..!."
"

1 ). जिष्णु रथेष्ठा: समयों युवास्य
यजमानस्य वीरो जायतां I
“निकामे निकामे न: पर्जन्यो वर्षतु
फलवत्यो न ओषधय: पच्यान्ताम
योगक्षेमे न: कल्पताम “
************************


” इस यज्ञ के याग्मान के घर पुत्र हो
विजयी , प्रखर वक्ता, युवा, रथचारी , वीर
ब्रह्मन , हमारे राष्ट्र में
होती रहे वर्षा याधावश्यक सदा
ओषधी बनती रहे फलवत अपने समय से
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***********************************
TO HIM WHO OFFERS THIS SACRIFICE,
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MAY HEAVEN RAIN IN ACCORDANCE WITH OUR NEEDS,
MAY OUR PLANTS RIPEN AND BEAR FRUITS IN SEASON,
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यजुर्वेद :- २२/२२
********************************
२ ). आ ब्रह्मन ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायताम I
आ राष्ट्रे राजन्य: शूर इशाब्योअतिव्याधि महारथो जायताम I
दोग्घ्री धेनुर वोदानंग्वान आशु: प्राप्ति: पुरुन्धिर योषा I
***************************************************
“ब्रह्मन , भगवान् हमारे राष्ट्र में
ज्ञान से भास्वान ब्राह्मण जन्म ले
योधा हमारे शूर, तीरंदाज़ और महारधी
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**************************************
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यजुर्वेद :- २२/२२

"
" WHAT YOU GOING TO DO WITH ME …?. SO FAR YOU DESTROYED ME , AND KILLED ME ETERNALLY, FOR NO REASONS AT ALL , NOW ON , I WILL GIVE YOU A THOUSAND REASONS TO DO SO, BEFORE DYING I MUST KNOW FOR WHAT I’M DYING OR BEING PUNISHED( THAT’S MY FUNDAMENTAL RIGHT), NOW I’LL DIE PEACEFULLY……!. BUT TILL THE END I’LL GIVE YOU INNUMERABLE REASONS………!.I DON’T GIVE A DAMN TO YOUR PARALLEL LEGAL SYSTEM……!."

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